परिंदों के घर उजाड़ कर बनेगा नया इन्दौर

जी हाँ! मेट्रो आ रही है इन्दौर में, इस बात की दस्तक भी हो गई और अब उसके स्टेशनों के निर्माण की तैयारियाँ भी चल रही हैं, ओवर ब्रिज, मेट्रो स्टेशन, मेट्रो मार्ग ये सब नए इन्दौर को गढ़ने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं, और इसी को इन्दौर की प्रगति का आधार माना जा रहा है। पर इस बीच उजड़ रहे हैं ग़रीबों के आशियाने, पक्षियों के घर और पेड़-पौधों, जिन्होंने सालों से इन्दौर को ताज़ा हवा दी है।

इन्दौर के रीगल चौराहे पर रानी सराय स्थित पुलिस मुख्यालय परिसर में सालों पुराने सैंकड़ों वृक्ष हैं, जिन पर हज़ारों तोतों और पक्षियों का घर है। सुबह होते ही रानी सराय का परिसर तरह-तरह के पक्षियों की चहचहाट से गूँजता है। यहाँ तोते और कबूतरों के साथ में कई प्रजाति के पक्षी देखने को मिलते हैं। इन पेड़ों पर तोतों और पक्षियों की बसाहट सालों पुरानी है। यहाँ बड़ी संख्या में दिन भर पक्षी बने रहते हैं, लेकिन अब इन पक्षियों का यह आशियाना उजड़ने वाला है। मेट्रो परियोजना के कारण रानी सराय (रीगल चौराहा) परिसर में सैंकड़ों साल पुराने पेड़ काटे जा रहे हैं, जिससे हज़ारों तोतों और अन्य पक्षियों का आशियाना उजड़ रहा है। विकास के नाम पर पक्षियों के सालों पुराने आशियानों को उजाड़ना किस खोखले पर्यावरण संरक्षण का दावा है, यह प्रशासन ही जाने! फ़िलहाल पर्यावरण प्रेमियों की जागरुकता के कारण यह मामला उच्च न्यायालय के दरवाज़े पर न्याय की गुहार लगा रहा है। ऐसे में सरकारों को भी यह सोचना चाहिए कि जो पक्षी आपको वोट नहीं देता पर वोट देने वालों को कई तरह के लाभ ज़रूर देता है, उसके आशियाने इस तरह तो न समाप्त किए जाएँ। इंसान ने पक्षियों को अनुपयोगी मान लिया है, लेकिन पक्षियों का जंगलों को बसाने में ख़ास महत्त्व है। जहाँ तक तोतों का सवाल है तो वह सूखे वृक्षों पर नेटिंग करने के साथ हरे-भरे वृक्षों पर अपने आशियाने बनाते हैं। सरकार यह कहती है कि हम अन्य स्थान पर दुगुने वृक्ष लगाएँगे तो श्रीमान जी तोते हैं वो, इंसान नहीं कि पुनर्वास करने में वह आसानी से समझ जाएँगे।
काश! पशु-पक्षी भी मतदाता होते, तब शायद इनकी आवाज़ बहरे लोकतंत्र को सुनाई देती।

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’
पत्रकार एवं हिन्दीयोद्धा
इन्दौर