डर्टी पॉलिटिक्स का शिकार हो रहा ‘इन्दौर’

स्वच्छता की पहचान बना इन्दौर अब डर्टी पॉलिटिक्स की चपेट में है। राजनीतिक खेल, आरोप और साज़िशें कैसे शहर को नुकसान पहुँचा रही हैं-जानिए पूरा सच।

राज की नीति और नीति का राज दोनों के बीच होती अहम की टक्कर कभी लोकतंत्र के लिए लाभदायक नहीं होती। यही मलाल अब प्रदेश की आर्थिक राजधानी और कई मुख्यमंत्रियों के सपनों के शहर इन्दौर को भी हो रहा है। यहाँ राजनीति की टकसाल से अब व्यक्तिगत अहम को बल देते नेताओं ने शहर को अफ़सरशाही की प्रयोगशाला में बदल दिया। और अफ़सर अब मनमर्ज़ी से इस शहर की तासीर को समझे बगैर बग़ैर अपने प्रयोगों से रोज़ सूली पर चढ़ाने में लगे हैं।
अंदरखाने की ख़बर तो यह है कि सत्ताधारी दल के नेताओं और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच की अनबन भी अब खुल कर सामने आ रही है। और इस मनभेद का फ़ायदा वो उठा रहे हैं, जो इन्दौर के कभी अपने नहीं रहे।
बीते दिनों शहर में दूषित और ज़हरीले पानी की सप्लाई से भागीरथपुरा क्षेत्र में पीने का पानी भी दूषित हो गया और 20 से अधिक लोगों की जान चली गईं। मामला राष्ट्रीय स्तर पर पहुँच गया, और देशभर में सबसे स्वच्छ शहर की साख पर पलीता लगना शुरू हो गया। काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की भद्द पिटना शुरू हो गई। मौके की नज़ाकत को समझकर मुख्यमंत्री ने इन्दौर से नियत दूरी रखना शुरू कर दिया। यह दूरी राजनीति प्रेरित और घटना के बाद अपने व्यक्तिगत अहम की तुष्टि को बल देने वाली साबित होने लगी। इसी बीच गणतंत्र दिवस पर झंडावन्दन के लिए मंत्रियों को जिलों के प्रभार दिए, उसमें भी कैलाश विजयवर्गीय को कहीं का प्रभार न देकर यह दिखाया गया कि कहीं कुछ ठीक तो नहीं हैं। इसी के तुरन्त बाद मंत्री विजयवर्गीय ने एक पत्र जारी कर निकटतम मित्र के परिवार में गमी का बहाना बनाकर 8 दिन का अवकाश, सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बना दी।
आख़िरकार मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच की अनबन अब सार्वजनिक होने लगी है। और इस डर्टी पॉलिटिक्स का खामियाज़ा शहर इन्दौर भुगत रहा है। शहर के फ़ैसलों में मुख्यमंत्री कार्यालय के रोकटोक अब जनता को दिखाई देने लग गई। पार्टी के भीतर की यह अनबन अब शहर की अव्यवस्था में बदल रही है, जो किसी भी तरह इन्दौर हित में नहीं है। इसका खामियाज़ा शायद जनता अपने वोट से भाजपा को भरने पर विवश कर दे।

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’
पत्रकार एवं हिन्दीयोद्धा
इन्दौर

एक साक्षात्कार – डॉ अर्पण जैन अविचल का…

नाम: डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

पिता: श्री सुरेश जैन

माता: श्रीमती शोभा जैन

पत्नी: श्रीमती शिखा जैन

जन्म: २९ अप्रैल १९८९

शिक्षा: बीई (संगणक विज्ञान अभियांत्रिकी)

एमबीए (इंटरनेशनल बिजनेस)

पीएचडी- भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ

पुस्तकें:

१. मेरे आंचलिक पत्रकार ( आंचलिक पत्रकारिता पर केंद्रित पुस्तक )

२. काव्यपथ ( काव्य संग्रह)

३. राष्ट्रभाषा (तर्क और विवेचना)

४. नव त्रिभाषा सूत्र (भारत की आवश्यकता)

साझा संग्रह:

१ मातृभाषा – एक युग मंच ( साझा काव्य) संग्रह

२. मातृभाषा. कॉम ( साझा काव्य संग्रह )

३. मरीचिका ( साझा काव्य संग्रह )
४. विचार मंथन ( साझा आलेख संग्रह )

५. कथा सेतु ( साझा लघुकथा संग्रह)

संपादन: मातृभाषा.कॉम

दायित्व:

राष्ट्रीय अध्यक्ष- मातृभाषा उन्नयन संस्थान

राष्ट्रीय अध्यक्ष- पत्रकार संचार परिषद

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- राष्ट्रीय मानव अधिकार परिषद महासंघ

अध्यक्ष- सेंस फाउंडडेशन

सदस्य- इंदौर प्रेस क्लब

सदस्य- फिल्म डायरेक्टर एसोसिएशन, मुंबई

 पत्रकारिता:

प्रधान संपादक- खबर हलचल न्यूज ( साप्ताहिक अख़बार)

प्रधान संपादक- के एन आई न्यूज ( न्यूज एजेंसी)

प्रधान संपादक- मधुकर संदेश

 व्यवसाय:

समूह सह संस्थापक- सेंस समूह

मुख्य कार्यकारी निदेशक- सेंस टेक्नॉलोजिस

संस्थापक- मातृभाषा.कॉम

संस्थापक- हिन्दीग्राम

संस्थापक- इंडियन रिपोर्टर्स

संपर्क: +९१- ७०६७४५५४५५ | +९१-९४०६६५३००५ | +९१-९८९३८७७४५५

अणुडाक: arpan455@gmail.com | अंतरताना:  www.arpanjain.com

पता: एस-२०७, नवीन परिसर, इंदौर प्रेस क्लब, म.गां. मार्ग , इंदौर (मध्यप्रदेश) ४५२००१

सम्मान:
1. पत्रकार विभूषण अलंकरण (आईजा, मुंबई)
2. गणेश शंकर विद्यार्थी श्रेष्ठ पत्रकार सम्मान ( गणेश शंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब, इंदौर इकाई)
3. नगर रत्न अलंकरण ( इंदौर )
4. काव्य प्रतिभा सम्मान (इंदौर)
5. Leaders of Tomorrow Award (Indiamart, Mumbai)
6. नेशन प्राईड, इंडिया एक्सीलेंस अवार्ड ( प्रतिमा रक्षा मंच, दिल्ली)

  1. हिन्दी साहित्य रत्न सम्मान (साहित्य संगम संस्थान, तिरोड़ी) ….. आदि

जीवन परिचय: डॉ.  अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्यप्रदेश के धार जिले की छोटी-सी तहसील कुक्षी में पले बड़े, और फिर आर्थिक राजधानी इंदौर में शिक्षा-दीक्षा लेकर पत्रकारिता जगत में कदम रखते हुए व्यवसायी बनें हैं |  29 अप्रैल, 1989 को कुक्षी में जन्मे अर्पण अपने माता-पिता के दो बच्चों में से सबसे बड़े हैं। उनकी एक छोटी बहन हैं। उनके पिता सुरेश जैन बिल्डिंग और सड़क निर्माण का कार्य करते है। परन्तु पिता के कारोबार में रूचि न होने और अपनी अलग दुनिया बनाने के ख्वाइश ने अर्पण को टेक्नोक्रेट बना दिया |

अर्पण जैन ने आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्धयालय कुक्षी में हासिल की, तथा फिर इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्धयालय के अंतर्गत एसएटीएम कॉलेज से कम्प्यूटर साइंस में बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान ही अर्पण जैन ने सॉफ्टवेयर व वेबसाईट का निर्माण शुरू कर दिया था। इसी दौरान सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी भी की |

एक मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले किसी भी शख्स का सपना क्या होता है? यही न कि एक अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के बाद मोटी रकम वाली सम्मानजनक नौकरी मिल जाए। लेकिन अर्पण अपनी इस 9 से 5 वाली और मौटे वेतन वाली नौकरी से संतुष्ट नहीं थे। एक दिन उन्होंने अपने कंफर्ट क्षेत्र से बाहर निकलने का फैसला किया और अपना खुद का उद्यम शुरू किया। सपने बड़े होने के कारण स्वयं की कंपनी बनाने का ख्वाब पूरा करने में अर्पण जुटे तो सही परन्तु दो माह बिना नौकरी के भी घर पर ही भविष्य की रणनीति बनाने के दौरान सभी बचत ख़त्म कर चुके अर्पण के जेब में मात्र १५० रुपये ही बचे थे | मात्र १५० रुपये लेकर ११ जनवरी २०१० को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस’ की शुरुआत हुई, अर्पण ने फॉरेन ट्रेड में एमबीए किया,तथा पत्रकारिता के शौक के चलते एम.जे. की पढाई भी की है | समाचारों की दुनिया ही उनकी असली दुनिया थी, जिसके लिए उन्होंने सॉफ्टवेयर के व्यापार के साथ ही खबर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की और इसे भारत की सबसे तेज वेब चेनल कंपनियों में से एक बना दिया। साथ ही ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनोतियाँ’ पर ही अर्पण ने अपना शोध कार्य किया है| सेंस टेक्नॉलजीस और खबर हलचल न्यूज भारत के लगभग 29 राज्यों में 180 से ज़्यादा लोगो की टीम के साथ कार्यरत पंजीकृत कंपनी है।

अर्पण जैन ‘अविचल’ ने अपने कविताओं के माध्यम से भी समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा हैं और आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता के आधार आंचलिक पत्रकारिता को ज़्यादा लिखा हैं |

अर्पण ने व्यापार के दूसरे क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट सफलताएँ प्राप्त की हैं। पत्रकारिता से अपने गहरे सरोकार को दर्शाते हुए उन्होंने भारत के पत्रकारों के लिए पहली सोशल नेटवर्किंग साइट ‘इंडियनरिपोर्टर्स (www.IndianReporters.com)’  बनाई, जिसके फलस्वरूप पंजाब, उत्तराखंड और सिक्किम जैसे भारत के सभी राज्यों के पत्रकार जुड़े हुए हैं | जैन ने कई संस्थाओं के साथ जुड़ कर पत्रकारिता के क्षेत्र में भी और अन्य सामाजिक कार्यों और जनहितार्थ आंदोलनों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है|

समाचारों की दुनिया से जुड़े होने के कारण अर्पण का हिन्दी प्रेम प्रगाड़ होता चला गया, इसी के चलते डॉ. अर्पण ने मातृभाषा.कॉम की शुरुआत की और फिर तब से लेकर आज तक हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्यरत रहे | इस दौरान भारत के विभिन्न राज्यों में हिन्दी भाषा के महत्व को स्थापित करने के लिए यात्राएँ की, जनमानस को हिन्दी से जोड़ा, और मातृभाषा उन्नयन संस्थान और हिन्दी ग्राम की स्थापना की | इसी प्रकल्प में योगगुरु और पतंजलि योगपीठ के सूत्रधार स्वामी रामदेव जी का आशीर्वाद मिला | वर्तमान में हिन्दी के गौरव की स्थापना हेतु व हिन्दी भाषा को राजभाषा से राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए संघर्षरत डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ भारतभर में इकाइयों का गठन करके आंदोलन का सूत्रपात कर रहे हैं, और वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं | डॉ. वेद प्रताप वैदिक के संरक्षण में संस्थान देश भर में हस्ताक्षर बदलो अभियान संचालित कर रही हैं|

 व्यक्तित्व (कार्य करने का तरीका) : किसी भी परिस्थिति में न हारना न अपने समूह को हारने देने के मूल वाक्य की तरह ही डॉ. अर्पण जैन अविचल कार्य करते हैं | ज़िद करों- दुनिया बदलोको मैं अपना कर्म वाक्य मानता हूँ |

 संघर्ष काल- व्यापार के बालपन में ही संघर्ष का कठिन काल मेरे जीवन में आया जिस दौरान आर्थिक नुकसान भी बहुत उठाया, इसी दौरान मेरे माता-पिता और परिवार के सहयोग से पुन: स्थापित हो पाया और उसके बाद जीवन का लक्ष्य ही बदल गया | हिन्दी भाषा के गौरव की स्थापना का ध्येय भी इसी दौरान चुना|

सफलता का राज: ‘मेहनत इतनी खामोशी से करो, कि सफलता शौर मचा दें’ इसी तथ्य के साथ सतत मेहनत और श्रम किया जाए तो जीवन में असफलता कभी छू भी नहीं सकती |

सबसे बड़ी उपलब्धि: जीवन में सबसे पहली और बड़ी उपलब्धि यह रही की उम्र के मात्र २१वें वर्ष में ही जिस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कार्य किया उसे खरीद कर अपनी ज़िद को साबित किया | फिर महज ५ वर्षों में ही पत्रकारिता जगत से लेकर साहित्य की दुनिया में एक अदद पहचान कायम कर सकने में कामयाब रहा |

भविष्य की योजना: वैसे तो अब संपूर्ण जीवन ही हिन्दी की सेवा में समर्पित कर चुका हूँ तो इसी तारतम्य में हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाना तथा हिन्दी को संपूर्ण राष्ट्र के अभिमान स्वरूप जनभाषा के रूप में स्थापित करवाने में हर संभव गतिशील रहना ही मेरे भविष्य की योजनाओं में शामिल हैं| साथ ही भारत में पत्रकारिता की शुचिता हेतु कार्य करना भी लक्ष्य हैं |

समाज को संदेश: समाज में निरंतर मानवता की हत्या सारे आम हो रही है, सबसे पहले हम भी मानव बने और बच्चों को मानव बनाएँ | इसके बाद हमेशा ज़िद करो तभी दुनिया बदलने का माद्दा रख पाओगे | क्योंकि ये दुनिया जिद्दी व्यक्तियों ने ही बदली है, बाकी ने उन जिद्दी लोगों का अनुसरण ही किया है | मेहनत का कोई अन्य विकल्प नहीं होता, केवल भाग्य के भरोसे या शार्टकट से कोई सफलता नहीं मिलती|

वेब मीडिया की कानूनी मान्यता में फिसड्डी केन्द्र सरकार

सरकार अब तक वेब मीडिया को कानून के दायरे में नहीं ला पाई..

वरिष्ठ पत्रकार अजय जैन ‘विकल्प’ की खबर दैनिक स्वदेश में 27/09/2017

अर्प

Arpan jain avichal

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के
अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के
मंजिल पे आया मुल्क हर बला को टाल के
सदियों के बाद फिर उड़े बादल गुलाल के…

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभेच्छा…

*अर्पण जैन ‘अविचल’*
Founder & CEO- SANS technologies,
Chief Editor- Khabar Hulchal News
Indore (m.p.)
www.arpanjain.com

सम्मान

प्रयास न्यूज एवं ‘गणेश शंकर विद्धयार्थी प्रेस क्लब* ने इंदौर शहर में पत्रकारिता और सफल खबर ग्रुप संचालन हेतु अतिथी डा. भूपेन्द्र गौतम साहब( पुर्व जनसम्पर्क अधिकारी एवं सहायक,मुख्यमंत्री म.प्र), अरविंद तिवारी जी (अध्यक्ष- इंदौर प्रेस क्लब) जितेन्द्र यादव जी (संस्थापक-सेव जर्नलिज्म फाउंडेशन) डा. शरद पण्डित जी (पुर्व संयुक्त संचालक- स्वास्थ्य सेवाएं, इंदौर ) संतोष गंगेले जी (प्रदेश अध्यक्ष- गणेश शंकर विद्धार्थी प्रेस क्लब) ने खबर हलचल न्यूज से मुझे सम्मानित किया…
सादर धन्यवाद प्रयास न्यूज परिवार एवं गणेश शंकर विद्धार्थी प्रेस क्लब का….