Socialite and Mediapreneur

Er. Arpan Jain

Er A.S.Jain (Known as Arpan Jain, born on 29th April 1989) is a young, talented entrepreneur, and who is the CEO of SANS Technologies.

स्तरहीन कवि सम्मेलनों से हो रहा हिन्दी की गरिमा पर आघात

स्तरहीन कवि सम्मेलनों से हो रहा हिन्दी की गरिमा पर आघात डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल‘ कवि सम्मेलनों का समृद्धशाली इतिहास लगभग सन १९२० माना जाता हैं । वो भी जन सामान्य को काव्य गरिमा के आलोक से जोड़ कर देशप्रेम प्रस्तावित करना| चूँकि उस दौर में भारत में जन समूह के एकत्रीकरण के लिए बहाने […]


एक साक्षात्कार – डॉ अर्पण जैन अविचल का…

नाम: डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ पिता: श्री सुरेश जैन माता: श्रीमती शोभा जैन पत्नी: श्रीमती शिखा जैन जन्म: २९ अप्रैल १९८९ शिक्षा: बीई (संगणक विज्ञान अभियांत्रिकी) एमबीए (इंटरनेशनल बिजनेस) पीएचडी- भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ पुस्तकें: १. मेरे आंचलिक पत्रकार ( आंचलिक पत्रकारिता पर केंद्रित पुस्तक ) २. काव्यपथ ( काव्य संग्रह) ३. राष्ट्रभाषा (तर्क और विवेचना) ४. नव त्रिभाषा सूत्र (भारत […]


दंभ में डूबे हुए शिवराज, भाजपा के उल्टे दिन शुरु

*दंभ में डूबे हुए शिवराज, भाजपा के उल्टे दिन शुरु* # *डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’* जैसे ही विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, मध्यप्रदेश के मुखिया के तेवर वैसे-वैसे अकड़ और दंभ से भरते जा रहे है । मुखिया के हाल बदले से है, या तो हार का डर सता रहा है या […]


सुनो…मेरे यार

सुनो, ये सब इतना आसान नहीं था, न ही इतना सहज था, न हो सकता था प्रेम, न ही हो सकता था द्वेष, सबकुछ अचानक से नहीं हुआ, जितने सरल रुप में दुनिया ने देखा, गुजरे जमाने की यादों के सहारे मैने जिया है तुम्हें, तुम्हारे रंग को.. मैने पाया नहीं तुम्हें अचानक से, मैने […]


प्रकाशित पुस्तकें ही है लेखक की पहचान

*प्रकाशित पुस्तकें ही है लेखक की पहचान* पुस्तक सर्वदा बहुत अच्छी मित्र होती है, इसके पीछे एक कारण यह है कि पुस्तक ही किसी सृजक के उपलब्ध ज्ञान का निष्कर्ष होती है। जब तक लेखक किसी विषय को गहनता से अध्ययन नहीं कर लेता उस पर लेखन उसके लिए संभव नहीं है और गहराई से […]


मासूमों की चित्कारों से लथपथ भारतीय राजनीति

मासूमों की चित्कारों से लथपथ भारतीय राजनीति डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल‘ भारत के भाल से पढ़े जा रहें कसीदे, कमलनी के तेज पर प्रहार हो रहा है, समाजवाद से गायब समाज है, वामपंथी भी संस्कृति और धर्म के बीच का अन्तर भूल चुके हैं, न देश की चिन्ता है,न ही परिवेश की| धर्म और जातियों के […]


अंतर्राज्यीय भाषा समन्वय से भारत में स्थापित होगी हिन्दी

अंतर्राज्यीय भाषा समन्वय से भारत में स्थापित होगी हिन्दी डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ विविधताओं में एकता की परिभाषा से अलंकृत राष्ट्र यदि कोई हैं तो भारत के सिवा दूसरा नहीं | यक़ीनन इस बात में उतना ही दम हैं जितना भारत के विश्वगुरु होने के तथ्य को स्वीकार करने में हैं | भारत संस्कृतिप्रधान और […]


लघुकथा- चुनौती

*चुनौती* सुन निगोड़ी… रोज सुबह उठ कर कहा चली जाती है, रोज के काम करना ही नहीं चाहती, घर के बर्तन, कपड़े, खाना बनाना ये सब कौन करेगा…? तेरी माँ??? नौकरी से ज्यादा जरुरी घर का काम भी है… रमा की सास ने रमा को डाँटते हुए कहा.. इसी बीच रमा का पति आकर कहने […]


ऐ जाने वाले, लौट के आ जाओं…

आदरणीय सुरेश सेठ साहब की अन्तिम विदाई पर समर्पित चंद पंक्तियाँ…   *ऐ जाने वाले, लौट के आ जाओं…* जब भी बदलती है बयार सभी, शहर की कोई परवाह नहीं करता, पर वो अकेला ही खड़ा रहा, इंदौर की आत्मा का कवच बनकर… एक शख्स जो रहा हमेशा शेर-सा शान-ए-इंदौर राजवाड़े को बचाकर गजासीन हो […]


यादों में हमेशा रहेंगे सेठ साहब

यादों में हमेशा रहेंगे सेठ साहब हाँ! याद है पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए पोस्टकार्ड अभियान हेतु सेठ साहब से मिलना, पूर्ण समर्थन करने से शुरु हुआ मिलना, जानना उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को…। शहर की जनता को राजवाड़ा वापस दिलवाने के संघर्ष से लेकर कई बड़े मुद्दे जिनमें स्ट्रीट लाईट की सौगात और यहाँ […]


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