राजनीति के अजातशत्रु का यूँ चला जाना…..खल गया साहब

राजनीति के अजातशत्रु का यूँ चला जाना…..खल गया साहब *डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’*   विधि के विधान के आगे विधिविद की भी नहीं चली, कर्क रोग ने जब से जकड़ा वित्त और न्याय मंत्री का दायित्व भी कमजोर होता चला गया, लंबे समय से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते-करते आखिरकार अरुण जेटली जी […]


सवाल तो विधान का था…

सवाल तो विधान का था… ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ■ डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ हस्तिनापुर के अनुबंध और करार में बंधें गुरू द्रोणाचार्य ने जब वनवासी बालक और क्षेत्रीय काबिले के सरदार के पुत्र को धनुर्विद्या सीखाने से इंकार कर दिया तो वही वनवासी बलवान एकलव्य गुरु द्रोण की मूर्ति से धनुर्विद्या सीखने लगा और पारंगत होने पर […]


हिन्दी योद्धा

हिन्दी योद्धा रत्नगर्भा भारत की धरा पर सदा से ही माँ, मातृभाषा और मातृभूमि के प्रति व्यक्ति के कर्तव्यबोध का व्याकरण बना हुआ है। हमारे यहाँ का ताना-बाना ही संस्कार और संस्कृति के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वाहन का बना है। हमारे यहाँ धर्मग्रन्थ भी ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ के सिद्धांत का प्रवर्तन करते है। […]


भारतीय पत्रकारिता में इंदौर शहर का योगदान

भारतीय पत्रकारिता में इंदौर शहर का योगदान डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’ जब धरती के गहन, गंभीर और रत्नगर्भा होने के प्रमाण को सत्यापित किया जाएगा और उसमें जब भी मालवा या कहें इंदौर का जिक्र आएगा निश्चित तौर पर यह शहर अपने सौंदर्य और ज्ञान के तेज से बखूबी स्वयं को साबित करेगा। हिंदी या कहें […]


वह बिनती लोहा…. इंदौर के पथ पर

वह बीनती लोहा…. इंदौर के पथ पर –डॉ अर्पण  जैन ‘अविचल’ भरी दुपहरी में सूर्य के ताप को सहती, जिसके तन पर कपड़े भी मजबूरी ने फाड़ रखे हो, चेहरे की झुर्रियाँ उम्र की ढलान की ओर साफ तौर पर इशारा कर रही है, जिम्मेदारियों का बोझ उठाते-उठाते थके हुए कंधे जो पति के आवश्यकता […]


सूतक लग चुका है… सनद रहें

सूतक लग चुका है…. सनद रहें –डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’ चुनावी मौसम खुमार पर आया, शहर के व्यस्ततम क्षेत्र राजवाड़े से माँ अहिल्या की प्रतिमा पर पहले बम के संदेह में जाँच करवाने के बाद भाजपा के मुखिया अमित शाह ने अपने चुनावी अभियान के तहत सड़क मार्ग से जनसंपर्क अभियान का प्रारंभ कर दिया । […]


मातृभाषा.कॉम | matrubhashaa.com के बारे में

मातृभाषा.कॉम | matrubhashaa.com मातृभाषा.कॉम के बारे में मातृभाषा.कॉम मातृभाषा.कॉम हिन्दी के प्रचार और प्रसार हेतु एक अंतरताना (वेबसाइट) है जिसका उद्देश्य है हिन्दी के नवोदित और स्थापित रचनाकारों की रचनाओं को सहेज कर लोगों तक ऑनलाइन उपलब्ध कराना, जिससे हिंदी के प्रचार के साथ-साथ रचनाकारों के लेखन से जनसामान्य परिचित हो सके। पटल पर लगभग […]


स्तरहीन कवि सम्मेलनों से हो रहा हिन्दी की गरिमा पर आघात

स्तरहीन कवि सम्मेलनों से हो रहा हिन्दी की गरिमा पर आघात डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल‘ कवि सम्मेलनों का समृद्धशाली इतिहास लगभग सन १९२० माना जाता हैं । वो भी जन सामान्य को काव्य गरिमा के आलोक से जोड़ कर देशप्रेम प्रस्तावित करना| चूँकि उस दौर में भारत में जन समूह के एकत्रीकरण के लिए बहाने […]


दंभ में डूबे हुए शिवराज, भाजपा के उल्टे दिन शुरु

*दंभ में डूबे हुए शिवराज, भाजपा के उल्टे दिन शुरु* # *डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’* जैसे ही विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, मध्यप्रदेश के मुखिया के तेवर वैसे-वैसे अकड़ और दंभ से भरते जा रहे है । मुखिया के हाल बदले से है, या तो हार का डर सता रहा है या […]


प्रकाशित पुस्तकें ही है लेखक की पहचान

*प्रकाशित पुस्तकें ही है लेखक की पहचान* पुस्तक सर्वदा बहुत अच्छी मित्र होती है, इसके पीछे एक कारण यह है कि पुस्तक ही किसी सृजक के उपलब्ध ज्ञान का निष्कर्ष होती है। जब तक लेखक किसी विषय को गहनता से अध्ययन नहीं कर लेता उस पर लेखन उसके लिए संभव नहीं है और गहराई से […]